From Album: The Unforgettables (1977)

एक ना एक शमा अँधेरे में जलाये रखिये,
एक ना एक शमा अँधेरे में जलाये रखिये |
सुबह होने को है, माहौल बनाये रखिये ||

जिनके हाथों से हमे ज़ख़्म-इ-निहा पहुंचे है,
जिनके हाथों से हमे ज़ख़्म-इ-निहा पहुंचे है |
वो भी कहते है के ज़ख्मों को छुपाये रखिये
एक ना एक शमा अँधेरे में जलाये रखिये ||

कौन जाने के वो किस राह-गुज़र से गुज़रे,
कौन जाने के वो किस राह-गुज़र से गुज़रे |
हर गुज़र राह को फूलों से सजाये रखिये,
एक ना एक शमा अँधेरे में जलाये रखिये ||

दामन-ए-यार की ज़ीनत ना बने हर आँसू ,
दामन-ए-यार की ज़ीनत ना बने हर आँसू |
अपनी पलकों के लिए कुछ तो बचाये रखिये,
एक ना एक शमा अँधेरे में जलाये रखिये ||

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